महाभियोग (Impeachment) एक संवैधानिक प्रक्रिया (constitutional process) है जिसके द्वारा किसी उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी (high-ranking government official), जैसे कि राष्ट्रपति, को उनके पद से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया तब शुरू की जाती है जब उस अधिकारी पर गंभीर कदाचार (serious misconduct), जैसे कि संविधान का उल्लंघन (violation of the Constitution), का आरोप लगाया जाता है। भारत में, महाभियोग की प्रक्रिया संसद (Parliament) द्वारा चलाई जाती है। यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया (Quasi-Judicial Procedure) है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 (Article 61) में राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन है। अनुच्छेद 56(1)(b) यह भी बताता है कि राष्ट्रपति को "संविधान के उल्लंघन" के लिए महाभियोग द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति पर महाभियोग केवल एक ही आधार पर चलाया जा सकता है: "संविधान का उल्लंघन" (Violation of the Constitution)। हालांकि, संविधान में "संविधान का उल्लंघन" को परिभाषित (define) नहीं किया गया है। इसका अर्थ व्यापक (broad) है और इसमें कई तरह के कार्य शामिल हो सकते हैं, जैसे:
राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
आरोप (Charges): महाभियोग की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में शुरू हो सकती है। सदन के कम से कम एक-चौथाई (1/4th) सदस्यों को लिखित रूप में राष्ट्रपति पर लगाए गए आरोपों पर हस्ताक्षर करने होते हैं।
सूचना (Notice): राष्ट्रपति को 14 दिन का लिखित नोटिस (written notice) दिया जाता है, जिसमें उन पर लगाए गए आरोपों का विवरण होता है।
प्रस्ताव (Resolution): 14 दिनों के बाद, सदन में महाभियोग के प्रस्ताव पर चर्चा होती है। यदि सदन के कुल सदस्यों के दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत (majority) से प्रस्ताव पारित (pass) हो जाता है, तो इसे दूसरे सदन में भेजा जाता है। इसे विशेष बहुमत (special majority) कहते है।
जांच (Investigation): दूसरा सदन आरोपों की जांच करता है। राष्ट्रपति को इस जांच में उपस्थित होने और अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है। वे स्वयं या अपने वकील (lawyer) के माध्यम से अपना बचाव (defense) कर सकते हैं।
दूसरा सदन (Second House): यदि दूसरा सदन भी आरोपों को सही पाता है और कुल सदस्यों के दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत से प्रस्ताव पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति को उसी दिन से पद से हटा हुआ मान लिया जाता है।
नहीं, भारत में अभी तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चलाया गया है। यह प्रक्रिया बहुत ही दुर्लभ (rare) और असाधारण (exceptional) मानी जाती है।
ये सभी तरीके महाभियोग से भिन्न हैं, क्योंकि इनमें संसद में कोई मतदान नहीं होता और ना ही किसी आरोप की जांच होती है।
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